24 वर्षों से कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जगा रहे जागरूकता। 24 बरस पहले की बात हैं। डॉ. हरशिंदर कौर और डॉ. गुरपाल सिंह पंजाब और हरियाणा की बॉर्डर पर ग्रामीण इलाके में एक कैंप आयोजित करने जा रहे थे। इसका मकसद था ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करना। इस तरह के कैंप वे अक्सर आयोजित करते थे। तभी उन्होंने एक इलाके में देखा कि कुत्ते जमीन से कुछ खींचकर बहार लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने उस तरफ देखा तो हड्डियों के ढेर के बीच एक नवजात मृत थी। इस घटना से आहात दम्पति ने जब ग्रामीणों से इस बारे में पूछताछ की तो ग्रामीणों ने बहुत सहजता से बताया कि किसी गरीब परिवार में कन्या का जन्म हुआ होगा जिसे बेटी की चाह नहीं होगी। यह सुनकर दम्पति चौंक गए। यही वह निर्णायक पल था जबकि उन्होंने गांव-गांव कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता जगाने का निर्णय ले लिया। पंजाब के एक डॉक्टर दंपत्ति पिछले 24 वर्षों से कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। इस दंपत्ति ने बच्चियों को सशक्त बनाने के अन्य काम भी किये हैं। दम्पति ने महसूस किया कि ...
केरल के तीन युवाओं ने ऐसी ई-साइकिल बनाई है, जो बैटरी और पैडल दोनों से ही चलती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इससे प्रदुषण बिल्कुल नहीं होता है। इस साइकिल के प्रति जन रूचि भी दिखाई दे रही हैं। भारतीय परिवारों में जब भी कार या नई मोटरसाइकिल खरीदी जाती है, तो उसका उत्सव मनाया जाता हैं। उत्सव मनाना ठीक है लेकिन यह याद रखना चाहिए कि जिस गति से भारत में कारों और मोटरसाइकिल की संख्या बढ़ती जा रही हैं वह प्रकृति के लिए ठीक नहीं हैं। लोग अगर सार्वजानिक वाहनों का या धुंआरहित वाहनों का उपयोग नहीं करते हैं तो पर्यावरण सुधार असंभव की हद तक मुश्किल हैं। बीते वर्षों में आईआईटी -कानपूर ने दिल्ली की हवा के बारे में जो अध्ययन किया उसमे वाहनों को प्रदुषण का दूसरा सबसे बड़ा कारक माना। Indeed Rojgaar भारत में प्रदूषण पर लगाम लगाने की नीयत से इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ने के बारे में सोचा जा रहा हैं। इसी कड़ी में एक केरल के कोच्चि की एक प्राइवेट कंपनी स्मैडो लैब्स के मिथुन संकर, असिन अल और जिश्नु पी ने भी अपना योगदान दिया हैं। इन युवाओं का स्टार्टअप मेकर गांव में हैं जो भारत का...